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Fantasy माया- एक अनोखी कहानी
#30

अध्याय ५        
 
छाया मौसी और माँठाकुराइन के बीच क्या बातचीत हुई इसका मुझे कोई अता-पता नहीं था| लेकिन रसोई में से मैं उनकी आवाज सुन रही थी| माँठाकुराइन ने जब डाँट कर मौसी से कुछ कहा यह भी मुझे सुनाई दिया था... खैर जो भी हो मैं एक थाली में मछलियां सजाकर और दूसरी थाली में दो गिलास और शराब की बोतल ले कर छाया मौसी के कमरे कमरे में दाखिल हुई, तो देखा कि माँठाकुराइन ज़मीन पर बैठी हुईं हैं अपने आगे उन्होने तीन मोमबत्तियाँ जला रखी है| 

उनका झोला उनके पास ही रखा हुआ है उसमें से उन्होने एक मिट्टी से बना लोटा निकाला और एक शीशी में से शायद कोई भस्मी जैसी कोई चीज़ निकली|

कमरा मोमबत्तियों की सुनहरी रौशनी से भरा हुआ था| खुली हुई खिड़कियों से ठंडी- ठंडी हवा आ रही थी और बाहर फिर से जोरों की बारिश शुरू हो गई थी- बिजली कड़क रही थी| छाया मौसी सेहरे पर एक अज़ीब सा भाव लिए पलंग पर बैठी हुई थी|

मैने दोनों थालियाँ माँठाकुराइन सामने रख दी|

माँठाकुराइन ने मुझसे कहा, “लड़की इस लोटे में कुए का पानी भरकर ला|”

“लेकिन बाहर तो बारिश हो रही है, माँठाकुराइन”, मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा|

“जानती हूं लेकिन मेरे तंत्र-मंत्र के लिए कुएं का पानी जरूरी है मुझे तेरी मौसी का इलाज करना है ना, इसलिए…”

मैंने मुस्कुराकर उनके हाथों से वह मिट्टी का लोटा लिया और भरी बारिश में आंगन के कोने में खुदे हुए कुएं से पानी लेने दौड़ती हुई गई| घर से बस में दो कदम ही बाहर  निकली थी कि भारी बारिश में मैं पूरा का पूरा भीग गई| वापस आते आते मैं यही सोच रही थी कि मौसी ने तो अपना इतना इलाज करवाया लेकिन उनके जोड़ों का दर्द आज तक ठीक नहीं हुआ, शायद तंत्र-मंत्र से वह ठीक हो जाए| 

मैं वैसे ही भागती हुई कमरे में दाखिल हुई|

मैंने देखा की छाया मौसी भी माँठाकुराइन के साथ नीचे ज़मीन पर बैठ  कर  शराब पी रही है|

जिंदगी में आज तक कभी मैंने छाया मौसी को शराब पीते हुए नहीं देखा था लेकिन आज देख रही थी और तो और न जाने क्यों मुझे लगा कि माँठाकुराइन मुझे एक अजीब सी ललचाई नजरों से देख रही है| उनकी आंखों में कुछ ऐसा था जिसे देख कर मैं थोड़ा डर सा गई| मुझे याद है एक दिन मैं बाजार से लौट रही थी, तब रस्ते में एक पेड़ के नीचे दो रिक्शावाले बैठे हुए थे|  वह मुझे कुछ इसी तरह से ही देख रहे थे| उनकी आंखों में एक हवस की प्यास थी, “अच्छा हुआ कि तू मेरी तांत्रिक क्रिया से बिल्कुल पहले इस अमावस की रात की बारिश में भीग कर नहा गई”
मैंने पानी का लोटा उनके सामने रखा, इतने में माँठाकुराइन बोली, “मेरे सामने जरा घुटनों के बल बैठ जा लड़की मैं तेरे माथे पर इस भस्मि का तिलक लगा देती हूँ”

उन्होंने जैसे ही मेरे माथे पर वह तिलक लगाया मेरा सर चकरा सा गया और आंखों के सामने कुछ देर के लिए अंधेरा सा छा गया… उस वक्त मुझे तो मालूम ही नहीं था की माँठाकुराइन ने वह तिलक मुझे वश में करने के लिए लगाया था और उसका असर भी होने लगा था...

मैं थोड़ा संभल कर बोली, “मैं कपड़े बदल कर आती हूं”

“इसकी कोई जरूरत नहीं, मैं यही चाहती हूं कि तू अपने सारे कपड़े यही उतार दे....  मैं तुझे नंगी देखना चाहती हूं…मैं तेरी मौसी के लिए जो तांत्रिक क्रिया करने जा रही हूं उसके लिए तुझ जैसी एक जवान लड़की को अपनी सारी शरम भूल कर मेरे सामने बिल्कुल खुली नंगी होना पड़ेगा...

यह सुनकर मैं एकदम चौंक गई| अजीब सी बात है  माँठाकुराइन का ऐसा कहने पर भी मौसी ने उनसे कुछ नहीं कहा... लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी मैं पूरी तरह माँठाकुराइन के वश में आ चुकी थी|
मैं चुपचाप उठ कर खड़ी हो गई धीरे धीरे अपनी साड़ी उतारने लगी|

“लड़की तुझे याद होगा मैंने कुछ देर पहले ही रखैल तहज़ीब का जिक्र किया था; मैं जो तंत्र-मंत्र करने वाली हूं उसके लिए मुझे एक रखैल की जरूरत है; जो कि तेरे जैसे ही जवान हो, खूबसूरत हो और जिसका खून तेरे खून जैसा गर्म हो... और मैं उसे अपनी दासी- एक बाँदी- की तरह इस्तेमाल कर सकूं| रखेल तहज़ीब के तहत दासियाँ- बांदिया को बदन पर कपड़े रखने की इज़ाज़त नही होती है| इसलिए जबतक मैं ना कहूँ तू इस घर में नंगी ही रहेगी... न तो तू कपड़े पहनेगी  और ना ही अपने बालों को बांधेगी...  मेरे मुझे तेरे बाल बिल्कुल खुले के खुले चाहिए और हां तेरा बदन बिल्कुल नंगा... ”, माँठाकुराइन ने कहा|

छाया मौसी भी चुपचाप मुझे एक एक कर के अपनी साड़ी ब्लाउज और पेटिकोट उतारते हुए देखा| मैंने कोई अंतर्वास नहीं पहन रखा था इसलिए अब मैं माँठाकुराइन के सामने मैं बिल्कुल नंगी खड़ी थी मेरे बाल भी खुले हुए थे…

यह देख कर माँठाकुराइन बोली, “तुम लोगों के घर में घुसने से पहले, मुझे गुसलखाने से किसी के नहाने की आवाज़ आ रही थी| इसलिए मैं चुपचाप घर के पिछवाड़े में जा कर देखने की कोशिश की कौन है? उससे पहले मैने रास्ते में मैने इस लड़की को तेरे घर की तरफ जाते हुए देखा था... मुझे गुसलखाने के दरवाजे में छेद दिख जाई क्योंकि उनमे से रौशनी आ रही थी| उनमें से झाँक के मैंने देखा था कि यही लड़की नहा रही है| हालांकि इसकी पीठ मेरी तरफ थी लेकिन इसको देखकर मैंने ठीक ही समझा था कि यह लड़की अच्छे जात की है, क्या लंबे घने काले घने रेशमी बाल है इसके, बड़े-बड़े सुडौल दुद्दु (स्तन), अच्छे मांसल कूल्हे… मुझे जैसी लड़की की जरूरत थी यह बिलकुल वैसी ही है|”

यह कहकर माँठाकुराइन ने अपने झोली से एक तस्वीर निकाली| यह तस्वीर एक बुजुर्ग औरत की थी उसके सर पर बड़ी बड़ी मोटी मोटी लंबी लंबी जटाएँ थी शायद यह माँठाकुराइन की गुरु रही होंगी... उन्होंने तस्वीर निकालकर छाया मौसी से कहा कि वह भी सिर्फ़ एक जंघीए के सिवाय अपने सारे कपड़े उतार दे और उनको कमरे के एक तरफ बैठने के लिया कहा|

फिर माँठाकुराइन ने छाया मौसी को वह तस्वीर पकड़ा दी और बोली कि वह इस तस्वीर को अपनी गोद में लेकर बैठे| उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि उनके आगे जो तीन मोमबत्तियां जल रही थी; मैं उन्हें छाया मौसी के पास एक त्रिकोण आकर में सजा के रखूं- एक मोमबत्ती उनके सामने और बाकी दो मोमबत्तियाँ उनके एक एक तरफ|
फिर माँठाकुराइन ने मेरे से कहा कि मैं अपनी छाया मौसी- जो कि अपनी गोद में वह तस्वीर लिए बैठी हुई थी- उनके सामने उकडूँ होकर बैठ जायुं|

माँठाकुराइन जैसे जैसा बोलती गई मैं बिल्कुल वैसा वैसा करती गई| उसके बाद माँठाकुराइन ने अपने लोटे से थोड़ा पानी लेकर पता नहीं क्या मंत्र बड़बड़ाती हुई के मेरे सर के ऊपर कुछ छींटे मारे- उनके ऐसा करते ही मेरे पूरे बदन में मानों एक तरह की बिजली सी दौड़ गई| इस बारे में अब कोई दो राय नही थी की बस्तव में वह एक ताकतवर और तजुर्बेदार तांत्रिक थी|

उसके बाद माँठाकुराइन ने अपने लोटेसे पानी लेकर के मेरी योनि और मेरा गुदा धोया और जो पानी बच गया था उन्होंने उसमें थोड़ी सी शराब मिलाकर उसे पीने को दी|

उस दिन के पहले मैंने कभी शराब नहीं पी थी| इसलिए शराब की झांस लगते ही मैं खांसने लग गई| लेकिन माँठाकुराइन मेरे बालों को सहला- सहला कर मुझे दिलासा देती हुई मुझे शराब और पानी का मिश्रण पीने को उकसाती रही|

मैंने बस थोड़ी सी ही शराब पी थी, पर मुझे नशा चढ़ गया था| कहीं मंत्रों का असर तो नहीं था? पता नहीं|
पर माँठाकुराइन का इंतजाम शायद अभी पूरा नहीं हुआ था| उन्होंने मुझे ज़मीन पर चित लिटा कर मेरे बालों को मेरे सर के ऊपर एक चादर की तरह फैला दिया| फिर उन्होंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगी होकर, उस लोटे में थोड़ा सा तेल- जो कि वह अपने साथ लेकर आई थी- वह डाला और लोटे को बिल्कुल मेरी योनि के सामने रख दिया| उसके बाद वह मेरे बालों पर पालती मारकर बैठ गई… जैसे कि वह मेरे बालों का एक आसान बनाकर उसके ऊपर बैठी हो|

मैंने नशे की हालत में किसी तरह से नजरें उठाकर उनको देखा उनकी आंखें मानो उनके माथे के अंदर धँस गई थी... आंखों का सिर्फ सफेद हिस्सा ही दिख रहा था और वह अपने दोनों हाथ ऊपर उठाएं कुछ मंत्र बड़बड़ा रही थी... और मेरी छाया मौसी एकदम जड़ बनी हुई सिर्फ़ एक जंघिया पहने माँठाकुराइन की गुरु की तस्वीर अपने गोद में लिए बैठी हुई थी… उसके बाद मैं ना जाने कहाँ खो गई…

क्रमश:
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माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 09-01-2019, 10:21 AM
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RE: माया- एक अनोखी कहानी-अध्याय १ - by naag.champa - 10-01-2019, 11:52 AM
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RE: माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 26-01-2019, 09:56 PM
माया- एक अनोखी कहानी- अध्याय ९ - by naag.champa - 26-01-2019, 09:56 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Johnyfun - 26-01-2019, 11:06 PM
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RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Black boy - 27-01-2019, 08:28 AM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Jyoti Singh - 27-01-2019, 05:27 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी-10 - by naag.champa - 30-01-2019, 11:11 AM
RE: माया- एक अनोखी कहानी- समाप्ति - by naag.champa - 30-01-2019, 11:14 AM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Johnyfun - 30-01-2019, 01:08 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 30-01-2019, 09:30 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Bregs - 31-01-2019, 11:57 AM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 31-01-2019, 12:59 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by jaunpur - 01-02-2019, 01:41 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 04-02-2019, 12:31 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by Tanu - 04-02-2019, 06:45 PM
RE: माया- एक अनोखी कहानी - by naag.champa - 05-02-2019, 12:41 AM
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RE: माया- एक अनोखी कहानी - by sri7869 - 04-07-2024, 08:39 PM



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