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Story ki INTRO bahut hi acchi hai.
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अपने मनपसंद जॉनर में ही लिखो बंधू जैसे नए पडोसी लिखा था .
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नई स्टोरी के लिए बेस्ट ऑफ लक । अगला अपडेट कब आ रहा है, भाई?
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Waiting for next and long update
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दोस्तों मेरा नाम मनीष है। मेरी पत्नी रेनू 32 साल की है और मैं 34 साल का हूं। मैं एक बिजनेस मैन हूं। रेनू यूनिवर्सिटी में मेरी जूनियर थी और हम एक दोस्त के जरिये पहली बार मिले और जल्दी ही हमें प्यार हो गया। ग्रेजुएशन के बाद मैंने फ़ौरन एक नौकरी कर ली और उसके 4 साल बाद हमारी शादी हो गयी। अब हमारी शादी को 8 साल हो गए हैं।
शादी के दो साल बाद रेनू ने भी नौकरी शुरू कर दी और मैंने नौकरी छोड़ कर बिज़नस शुरू किया। शुरुआती दौर काफी मुश्किल था लेकिन फिर मेरा काम ठीक होता गया और रेनू भी तरक्की करती गयी। अब हम दोनों ही का करियर काफी ठीक हो गया है।
अभी एक साल पहले हमने राजधानी से सटे हुए इलाके में अपना पहला घर खरीदा था। ये एक काफी बड़े एरिया में बसी हुई सोसाइटी थी लेकिन इसमें सिर्फ डुप्लेक्स विला ही थे। यह काफी पॉश सोसाइटी थी जहाँ केवल दो घर एक दूसरे के बगल में बने थे और फिर 200 मीटर के बाद दो घरों का एक और ब्लॉक था। इस तरह के कुल 30 ब्लाक और कुल 60 मकान इस सोसाइटी में थे। हमारे घर के ठीक सामने एक गोल्फ कोर्स था और इस घर को लेने के लिए सबसे बड़ी वजह इसके पीछे बना निजी स्विमिंग पूल था जो की सिर्फ 20 घरों में था। बाकी लोगों के लिए क्लब हाउस का स्विमिंग पूल था।
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मैं आराम से अपने ड्रिंक की चुस्कियां ले रहा था की तभी रेनू ने पूल में छलांग लगे और पानी के छींटे उड़ कर मेरे ऊपर गिरे। रेनू ने डुबकी लगाई और वह सतह के नीचे तैरती हुई अंत में दूसरे छोर पर निकली।
मैं अपना ड्रिंक टेबल पर रखकर खड़ा हो गया और मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतार दी।
मैं 6 फुट का हूँ और बहुत मोटा भी नहीं हूँ और बहुत दुबला भी नहीं हूँ। मैं अपनी पत्नी की तुलना धीरे से पानी में कूद गया और तैरते हुए रेनू के पास चला गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया, हमारे गीले चेहरे धीरे धीरे करीब आये और मैंने उसके होठो को अपने होठो से बंद कर दिया।
"मैं कल छुट्टी लूंगी" उसने किस तोड़ कर बोला। उसके सुंदर होंठ पानी की नाजुक बूंदों से ढके हुए बहुत खूबसूरत लग रहे थे।
आज रविवार था और अब तक बहुत अच्छा बीता था लेकिन दोपहर ढल रही थी और जल्दी ही शाम होने वाली थी।
मैं उसे फिर से चूमा, "काम करने का तो मेरा भी मन नहीं है बेबी।"
"चलो दोनों कल छुट्टी लेते हैं, एक दिन अपने लिए निकालें, मस्ती करेंगे।"
मैं मुस्कुराया, "तुम्हें तो पता है की कल मुंबई से क्लाइंट आ रहे हैं तो मीटिंग के लिए जाना ही होगा। कल तो छुट्टी मुश्किल होगी..."
इससे पहले कि रेनू जिद करती बगल के यार्ड से एक आवाज आई।
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"हेल्लो!"
ये हमारे पड़ोसी advocate राजेश जी थे। वो एक सज्जन व्यक्ति थे जिनकी उम्र लगभग 48 वर्ष होगी। वो पेशे से एक वकील थे। लगभग 5'-8 " का कद और एक गठा हुआ शरीर। जिम वाला नहीं लेकिन निश्चित रूप से अपनी उम्र के हिसाब से वो काफी फिट थे।
वह मिलनसार स्वभाव के थे और अक्सर हमसे बातें करने आ जाते थे। उनकी पत्नी दिव्या बैंगलोर में अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटी के साथ रहती है और वह 3 साल से अधिक समय से यहाँ अकेले रह रहे थे। उनकी बेटी साल में एक बार दफ्तर से छुट्टी लेकर अपनी माँ के साथ उनसे मिलने आती थी और बीच बीच में राजेश भी उनसे मिल आते थे लेकिन ज्यादातर वह बगल के घर में अकेले रहते थे।
मैंने उनसे एक बार पूछा की वो भी बंगलौर क्यों नहीं शिफ्ट हो जाते तो उन्होंने कहा की काम धंधा तो यहाँ है तो वहां क्या करेंगे और एक दो सालों में बेटी की शादी हो जाएगी तो दिव्या भी वापस आ जाएगी। हालाँकि वो बहुत कम ही ऑफिस या कोर्ट जाते थे और मैंने उनको ज्यादातर घर पर ही देखा था। उन्होंने कोई नौकर भी नहीं रखा था और अपने सारे काम वो खुद ही करते थे।
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वैसे तो दूसरे सारे घरों के बीच दीवार थी पर पता नहीं क्यों हम दोनों के घर सिर्फ कुछ पेड़ लगा कर अलग किये गए थे। बिल्डर ने कहा था की यदि आप चाहें तो दीवार खड़ी करवा सकते हैं लेकिन दीवार न होने से हमारा लॉन बड़ा लगता था तो हमने जरूरत नहीं समझी। राजेश हमेशा अपने घर पर काम करते रहते थे और उनका ज्यादातर वक़्त लॉन को ठीक करने में जाता था। उनके लॉन की स्थिति हमारे मुकाबले काफी बेहतर थी। इस वक़्त भी वो अपने गमलो में खाद डालने आये थे।
"अरे वकील साहब, कैसा चल रहा है?" मैंने उत्तर दिया। रेनू उन्हें देख कर पानी के नीचे चली गई, उसको लगा की पानी में उसकी बिकिनी ज्यादा छोटी लग रही होगी तो वो राजेश से बचना चाहती थी।
राजेश ने खाद के बैग को रख दिया और मुस्कुराते हुए हमारे हिस्से में चले आये।
"अरे मनीष जी बस लॉन का कभी न खत्म होने वाला काम, कभी खाद डालो तो कभी घास काटो तो कभी पेड़ों की छटाई, यही सब चलता रहता है।" वो रुके और पूल में रेनू की तरफ देखने लगे जो अब वापस पानी की सतह पर आ गयी थी।
"जी खुद करने में मेहनत तो है लेकिन हमारा लॉन देखिये। माली के भरोसे छोड़ने से क्या हालत है और आपका लॉन इसके मुकाबले शानदार है और आप मुझे मनीष जी न कहा करें। आप तो मुझे मोनू कह कर बुलाया करें। सभी दोस्त इसी नाम से बुलाते हैं" मैंने कहा।
"तय रहा लेकिन आप भी मुझे राजेश पुकारेंगे। आप दोनों हमेशा मुझे राजेश जी कहते हैं। भाई मैं इतना भी बूढा नहीं हूँ।" वो हँसते हुए बोले।
"आप दोनों इस पूल का खूब आनंद लेते हैं वर्ना आपसे पहले यहां रहने वाले लोगों ने तो कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया। हर इतवार को मैं देखता हूं तो आप लोग तैर रहे हैं।"
"बस पैसे वसूल कर रहे हैं।" मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
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Good One... ek request hai, STORY ko slow-seduction rakhna. Taki padhne mein aur bhi maja aye.
(This post was last modified: 13-09-2021, 07:48 PM by
RJ668. Edited 1 time in total.)
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“मार्गरीटा पीयेंगे? आज हमने थोड़ी ज्यादा बना ली है।”
उन्होंने अपना सिर न में हिलाया, “पहले तो मुझे इधर आना ही नहीं चाहिए था लेकिन अब और रुक कर आप लोगो को डिस्टर्ब नहीं करूंगा।”
“अरे कैसी बात करते है, इसमें डिस्टर्ब करने की क्या बात है” मैंने जोर देकर कहा “रेनू डार्लिंग, प्लीज राजेश के लिए एक ड्रिंक ले आओगी” मैंने रेनू की गांड को पानी के नीचे थपथपाया।
रेनू मुस्कुराई और थोड़ा शरमाते हुए बोली “बिल्कुल अभी लाई”
रेनू धीरे-धीरे सीढ़ियों से ऊपर चली गई और पूल से बाहर निकलते ही उसके बड़े मम्मो से पानी बह निकला। उसकी बिकनी नार्मल पुराने ज़माने टाइप की थी लेकिन फिर भी उस सुर्ख गुलाबी टू पीस बाथिंग सूट में उसका जितना बदन दिख रहा था उतना आज तक राजेश ने नहीं देखा था। अपने पड़ोसी को अपनी सुन्दर बीवी का बदन दिखाने में मुझे एक गर्व सा महसूस हो रहा था।
राजेश मेरी वजह से सीधे रेनू को घूर नहीं पा रहा था लेकिन यह तय था कि उसने जो देखा वह उसे बहुत पसंद आया। जब से हम यहाँ आए हैं, वो जब मौका मिलता तो मेरी नज़र बचा कर रेनू को ताड़ने में संकोच नहीं करता था, लेकिन मुझे बुरा नहीं लगता क्योंकि लगभग हर आदमी जो रेनू के संपर्क में आता है, वह यही करता है तो मुझे अब इसकी आदत सी हो गयी है।
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मैंने अपने मन से इस विचार को हटाया और अपनी सेक्सी बीवी को चोदना जारी रखा। लेकिन इस विचार से मेरी उत्तेजना चरम पर पहुच गयी और मैं मेरी बीवी की चूत में ही झड गया। मेरे झड़ते ही रेनू धीरे से सिसकी भरी। अक्सर मैं उसे झडवा कर ही झड़ता था लेकिन आज राजेश के बारे में सोचते हुए मैं जल्दी झड गया।
चुदाई के बाद हम दोनों साथ साथ नहाये और फिर सोने के लिए लेट गए। दोपहर की बात फिर से मेरे दिमाग में कौंध गई और मैंने रेनू से कहा, “आज दोपहर को राजेश तुम्हे कुछ ज्यादा ताड़ रहा था न?”
रेनू ने आह भरी, “तुम्हें तो हमेशा लगता है कि लोग मुझे ताड़ रहे हैं।”
मैं हँसा, “क्योंकि वो ताड़ते हैं। खासकर हमारे पड़ोसी वकील साहब”
रेनू शरमा गई, “हो सकता है... वैसे उसने पहले भी तो मुझे स्विम सूट में देखा है।”
मैंने बोला, “उस बेचारे को ज्यादा एक्शन तो मिलता नहीं है। बीवी साथ रहती नहीं और ज्यादा बाहर वो जाता नहीं और रंडी घर लाता हो उस तरह का आदमी भी नहीं है तो मैं उसे ऐसे माल को घूरने के लिए दोष नहीं ठहरा सकता।”
रेनू ने मुझे कंधे पर हलके से थप्पड़ मारा “ठरकी आदमी।” उसने मजाक में कहा।