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मेरी भाभी का नाम कीर्ति... मेरे भाई मुझसे ६ साल बड़े है। भाभी और भैया के बीच का आयु अंतर भी ६ साल होने की वजह से, मैं और भाभी हमउम्र है। क्या कहूँ भाभी के बारे मैं? भैया की शादी ५ साल पहले हुई थी, तब मैं जावानी में कदम रख चूका था, और लडकियो का गोरा कलर और अंग उपांग स्वाभाविक से मुझे अपनी और आकर्षित करते थे, वैसा ही भाभी के साथ हुआ था। पहला रिएक्शन था की भैया की तो लॉटरी लग गई.... ५'६" की हाइट, बिलकुल मेरी हाइट जैसी... एक परफेक्ट फिगर जो होना चाहिए वही था। तब तो नही पता क्या साइज़ था पर आज कुल मिला के ३६-२४-३६ का परफेक्ट फिगर बना रख्खा है। हमेशा साडी पहनती है, पहले नही, पर अब घर में जितना डीप हो सके उतना डीप गले वाला ब्लाऊज़ पहनती है, साडी वैसे ही ट्रांसपैरंट होती है... बहोत सारी लिंगरी भी खरीद की हुई है, कुछ तो मैंने ही दिलवाई है। अपने जिस्म पर उसे बहुत गुरुर है, और होना ही चाहिए उसे... क्योकि कई लोग उसे पाने की ख्वाहिश रखते है, भाभी की परोपकारी भावना ही यह कहानी का मुख्य कारण बना है... पुरष का बिस्तर, पुरुष की इच्छा अनुसार गरम करना औरत का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है ... ऐसी भाभी की सोच है...
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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घर में ऐसे कपडे? हा तो मैं एक बात बताना भूल गया, मेरे माँ बाप बहोत पहले ही एक आकस्मिक घटना के शिकार हो कर कार एक्सिडेंट में भगवान् को प्यारे हो गए है...
भैया की जब शादी हुई थी, तब माँ बाप ज़िंदा थे। और सिर्फ १ साल में ही हादसा हुआ और चल बसे। घर में भाई के ऑफिस जाने बाद, में भी कॉलेज चला जाता था। घर में भाभी अकेली ही रहती थी। पसंद आये ना आये पर यही होता था। भैया को ऑफिस जाना पड़ता था, सब जिम्मेदारी उनके ऊपर थी, और मैं तो ठीक कभी जाता था कॉलेज तो कभी नहीं। कॉलेज के दिन तो यही होता है ना....?
पर माँ बाप के जाने का सदमा मुझे इस कदर लगा था के, मैं कॉलेज की परीक्षा में फ़ैल हुआ। भैया कभी गुस्सा नहीं करते मुज पर, और उस दिन भी नही किया, मुझे पास बिठा कर शांति से समजाया के संसार का यही नियम है। तुम्हे धक्का जरूर लगा है, मुझे भी लगा है, पर हमारे माँ बाप तभी सुखी होंगे जब हम कामयाब होके बताएँगे....
बात भी सही थी उनकी... पर मेरा एक ही कन्सर्न था के भाई तो फिर भी ठीक है, रात को अपनी फ्रस्ट्रेशन निकाल देते होंगे, भाभी भी पूरा दिन भैया के लिए अपने आपको संवारती थी, और रात को भाई की बाहों में टूट के बिखर जाती थी। मैं भाई का बिस्तर गरम होते कई बार देख चूका था। शायद चस्का लग गया था मुझे, भैया और भाभी की चुदाई देखने का। भाभी को नंगा देखने की तलब ऐसे खत्म होगी ये नही पता था मुझे। हर रोज़ भाई भाभी आगोश में लिपटे एक दूसरे को सुख देने में नही पर एक दूसरे से सुख लेने में लगे होते दीखते थे। भाई का चहेरा सुबह और खिल जाता था।
कई बार ये सवाल ध्यान में आता है, की कोई गुज़र जाए तो चुदाई करनी चाहिए या नहीं? मैं कहता हु के हा, मन हो रहा है तो कर ही लेनी चाहिए तो ही आपका दिमाग शांत रहेगा और लड़ने की ताकत मिलती रहेगी...
तो यही बात थी जो मुझे खटक रही थी की, अब मेरा कौन... मुझे कई बार खयाल आता था के मैं रंडी बाजार चला जाउ। और अपनी वासना को शांत कर दूँ। पर ये इतना आसान नही होता। तो बस मैं शांत होने लगा, और शांत, और शांत... भैया ने मुझे छूट दे दी थी की अगर एक साल ड्रॉप लेना चाहते तो ले सकते हो और घूमने जाना चाहते तो वो भी कर सकते हो... मानसिक सपोर्ट भैया और भाभी दोनों दे रहे थे... पर शायद मुझे शारीरिक सपोर्ट चाहिए था....
भैया वैसे सब समजते थे, क्योकि वो शादीशुदा थे....
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एक दिन की बात है, मैं कॉलेज नहीं गया था, और भाभी मुझसे बाते कर रही थी अचानक मुझसे पूछा
कीर्ति: भैया आपके कोई फ्रेंड्स नहीं है क्या जहा आप अपने दिल की बाते शेयर कर सको? (वो मुझे रिश्ते के कारन भैया बुलाती थी)
मैं: हा है तो सही भाभी पर सब मतलबी होते है, कुछ कुछ लोग सही भी है, जो मेरी केर करते है, पर ठीक है, मैं दुरिया बनाता हूँ।
कीर्ति: ऐसा क्यों भला? जब तक जानोगे परखोगे नहीं तब तक कैसे पता चलेगा?
मैं: हम्म बात तो सही है आपकी.. ठीक है मैं कोशिश करूँगा।
यही वार्तालाप मेरे हसीन पलो को दस्तक देंगी ये पता नहीं था... मैं अपने दोस्तों से मिलने लगा... सब के साथ मस्ती मारने लगा... अच्छा लगा और में नेक्स्ट परीक्षा में पास भी हुआ !!!!! में मन से खुश रहने लगा था... दोस्तों के साथ बात करता तो पता चला के सब कोई न कोई लड़की पे मरता है कैसी फेंटेसी लेके बेठे है, एक अजीब रोमांच देता था, पर वासना को और भड़का रहा था... मिलके अब हम सिर्फ ५ फ्रेंड्स है.... केविन, सचिन, राजू, कुमार और मैं...
केविन के पापा बहुत बड़े बिजनसमैन थे, सचिन के पापा किराने की दुकान थी, राजू के और कुमार के पापा मजदुर थे तो लॉन लेकर पढ़ते थे... पर हमारे बिच पैसा नही था, बस विश्वास और प्यार था... उसीके कारन दोस्ती इतनी गहरी हुई थी...
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मेरी भाभी को घूरने की हिम्मत बढ़ती जा रही थी... मैं घूरे जाता था... उनकी आँखे बयां करती थी के उसे पसंद नही आता है... पर मैं अपने आपको कंट्रोल कर ही नहीं पाता था.... मैंने फिर एक बार हिम्मत जुटा कर अपने दोस्तों के बिच बात निकाली....
मैं: दोस्तों... उस दिन मैं कुछ भावना मैं बह गया था। पर मुझसे रहा नहीं गया, कोई मेरी हेल्प कर सकता है क्या?
कुमार: कहना क्या चाहते हो?
मैं: मैं भाभी को चोदना चाहता हूँ...
(सब एक दूसरे को तके हुए थे, क्या बोलते?)
मैं: मैं भाभी को बस पाना चाहता हूँ, और मसलना चाहता हूँ
केविन: तू जनता भी है तू क्या बोल रहा है?
मैं: हा...
सचिन: पर ये होगा कैसे...?
केविन: क्या भड़वे क्या बके जा रहे हो तुम लोग... ये मुमकिन नहीं है...
मैं: पर मुझे बनाना है...
केविन: तो तूने कुछ सोचा है... जो हमसे तू छुपा रहा है...
मैं: हा कुछ चल तो रहा है....
थोडा पीछे जाते है... मैं भाभी को तके जा रहा था... और भाभी ने मुझे ३-४ बार ऐसे ही पकड़ा...
भाभी: क्या देख रहे हो...
मैं: कुछ नहीं बस ऐसे ही... आप थक जाते होंगे दिनभर नहीं?
भाभी: तो?
मैं: बस ऐसे ही...
भाभी: थोडा पढाई पर भी ध्यान दो...
मैं: देंगे... धीमे धीमे...
भाभी: कुछ अलग दिखने लगे हो... भैया... आपके भैया को बोलना न पड़े ध्यान रखना...
मैं: अरे भाभी... बता दीजिएगा... क्या फरक पड़ता है...
उस रात भैया जब भाभी को अपने निचे ला कर घबाघब पेल रहे थे, भाभी शायद उसके वीर्य निकलने की राह देख रहे थे शायद... हमारे दोनो भाइयो के कमरे में अंतर नहीं था... बाल्कनी से आप भैया भाभी की सम्भोग रस का आनंद ले सकते थे... आवाज नहीं सुनाई दे सकती थी... पर उस दिन मैंने उनके रूम में मैंने एक पुराना फोन रखा था जिसमे सब रेकॉर्ड हो जाए... दूसरे दिन तक वो चालू रहा २२ घंटे तक पर मैं सिर्फ काम की बाते आपको सुनाऊँगा....
भैया भाभी रूम में गए रात को....
भाभी: आह... एक मिनिट...
भाई: रहा नही जाता... मेरी रांड....
भाभी: हा मेरे मालिक आप ही का है... पर आज तैयार होउ के बस ऐसे ही?
भाई: नंगी ही तो होना है.. मैंने बोला है न की.. जब मैं अंदर आ जाऊ तब अगर तैयार हो चुकी है तो ठीक है, मैं इंतज़ार बरदास्त नहीं कर सकता...
भाभी: तो फिर... आउच... धीमे... आप ही की हूँ....
भाई: खा जाऊंगा आज तो...
भाभी: बस... आह... उम्म्म्म्म... आउच... हर रोज़... आह... बोलते हो... और... आह... उम्म्म्म्म... एक छोटा सा लव बाइट भी तो नहीं देते...
भाई: पण तुम्हे पसंद नही है ना इसलिए....
भाभी: पर तुम्हे तो है... आज मैंने आपके लिए कोई तयारी नहीं की... आज सजा के दौर पर एक लवबाइट दे देना...
भाई: कहा दूँ?
भाभी: जहा मर्जी करे आपकी... आ.....उ....च.... अरे बूब्स पर नही... आह.... उई माँ....काट दिया....सच में?
भाई: हा मिलेगी सजा जरूर....
भाभी: आप खुश है ना?
भाई: हा...
भाभी: दीजिये कोई बात नहीं...
फिर आवाज़ नहीं आई तकरीबन ३० मिनिट तक, पर आह आह आउच और प्यार भरी अलग अलग आवाज़े आती रही... पलंग की किचुड़ किचुड़ आवाज़ भाभी की घिसाई का प्रमाण देती रही... जो मैं कल रात को देख चूका था वो आज मैं सुन रहा था.... और वासना शांत हुई...
भाभी: आज क्या हुआ था आपको?
भाई: बस मज़ा आ गया...
भाभी: खुश है ना आप?
भाई: हा, बहोत खुश हूँ...
भाभी: एक बात बोलुं?
भाई: हा बोलो
भाभी: मुझे एक बात खटक रही है...
भाई: क्यों क्या हुआ?
भाभी: मैं कुछ बुरा नहीं चाहती पर.... भैया... लगता है की भैया मुझे अच्छी नज़रो से नहीं देखते...
भाई: क्या बकवास कर रही हो?
भाभी: देखो आप गुस्सा मत हो पर ऐसा मुझे लगता है...
भैया काफी देर तक चुप रहे... और बोले...
भैया: तुम क्या चाहती हो..?
भाभी: मैं कुछ चाहती नहीं हूँ बस आपके ध्यान में लाना आवश्यक था तो बोल दिया...
भैया: इग्नोर करो... या फिर तुम खुद बात करो... मैं बिच में पडूंगा तो भी तेरा ही नाम आएगा... और गन्दा लगेगा... अगर तुम बात करोगी तो मेरे डर के कारण अगर ये हो भी रहा है तो नहीं होगा... क्या कहती हो...
भाभी: मुझे वैसे शर्म तो आएगी पर ये बात मुझे ठीक भी लग रही है...
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मेरा मेरे भाभी को घूरना चालू रहा... खास करके बूब्स और गांड... इतनी इठलाती थी वो की बस मुझे जानबूझकर देखने की कोशिश करनी नही पड़ती थी... मेरी आँखे टिक जाती थी ऐसे ही...
एक दिन भाभी: समीर तुम मुझे यु घूरना बंध करोगे?
मैं: क्यों? क्या हुआ?
भाभी: मुझे शर्म आती है और ये सही भी नहीं है... मुझे आपके भैया से बात करनी पड़ेगी...
मैं: कर दो... ज्यादा से ज्यादा ज़ग़ड़ा होगा और क्या?
भाभी: क्यों कर रहे हो ऐसा?
मैं: भाभी... प्यार करने लगा हूँ आप से...
भाभी: (एकदम गुस्सा होकर) क्या घटिया बोल रहे हो... समज नहीं आता की क्या बोल रहे हो?
मैं: (भाभी का ये स्वरुप देखकर मैं डर तो ज़रूर गया और भैया का ख्याल आने पर थोड़ी फ़टी तो पड़ी थी मेरी पर) जाओ मैं आपसे बात नहीं करता...
(ये था उल्टा चोर कौतवल को डांटे)
भाभी: ले भला... क्यों? गलती आप कर रहे हो और....
मैं: और नहीं तो क्या... दिन भर मेरे साथ ही रहती हो मेरी पास ही रहती हो.. मेरी कोई गर्ल फ्रेंड भी नहीं है... तो फिर आपसे प्यार युही हो गया... क्या करू.. हम हमउम्र भी है... मैं तो आखिर जवान हूँ... जो करना है करो... मुझे नहीं पता क्या गलत है और क्या नहीं...
ये में सच में अपने दिल की बात बोल रहा था... मैं सच में इमोशनल हो गया और रो ही पड़ा.... मैं फ़साना जरूर चाहता था... पर... इमोशनल हो चूका था....
भाभी: देखो समीर भैया ऐसे नही रो आप... मैं पानी लाती हूँ...
मैं: भाभी मुझे पानी नहीं प्यार की जरूरत है...
भाभी: क्या मतलब? (गुस्सा आश्चर्य दोनों भाव साथ थे इसमें)
मैं: मतलब कुछ नहीं भाभी मैं बस प्यार चाहता हूँ, क्या मैं आपको प्यार नहीं कर सकता? क्या गलत है? (मेरा रोना चालू ही था)
भाभी: पर... पर ये गलत है... प्यार हम भी आपसे करते है, पर आपकी भावनाए कुछ अलग बयां कर रही है... जो मुमकिन नहीं है...
मैं: भाभी... क्यों गलत है एक कारन बताओ...
भाभी: (मक्कमता से बोली) गलत है मतलब गलत है... और आइन्दा मुझसे बात मत करना...
मैं फिर चला गया वहा से... पर अब मेरा काम था के भाभी भैया को अपडेट क्या देते है? हररोज़ मैं रेकॉर्डिंग् लगाता था और सुनता था, मेरा भाभी को ज़ाखना चालू था... भाभी इग्नोर करती थी... एक दिन एक रेकॉर्डिंग् में जब भैया भाभी का सम्भोग खत्म हुआ भैया ने भाभी को सामने से पूछा
भैया: समीर से कुछ बात हुई क्या उस बारे में?
भाभी: (थोडा हिचकिचाके बोली) नही.. हा एक बार हुई थी, वो बस ऐसे ही खो जाता है सोच विचार में वो क्या करता है उसे नही पता... इमोशनल है न...
भैया: ह्म्म्म तुम खामखा डर रही थी... ऐसे तू है ही मस्त माल किसीके भी पेंट का घण्टा बजवा सकती हो
ऐसा कह कर दोनों हसने लगे और उस दिन भाभी ने भैया को शायद और एक बार अपना शरीर सोपा, जिसके शायद भैया ने बहोत मज़े लुटे होंगे...
मैंने भाभी को बुलाना बंध कर दिया था... मैं नज़रे चुरा रहा था। मैं बाते भी नहीं कर रहा था... मानो जैसे मैं उससे नफरत करता हूँ। भाभी को यह बरदास्त नही हो रहा था.... एक दिन....
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.