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:shy: :shy: :shy:में बहुत डर गया और फिर मैंने दीदी से माफी माँगी और कहा कि में फिर कभी ऐसा नहीं करूंगा, प्लीज मुझे माफ़ कर दो, प्लीज यह बात किसी को मत बताना वर्ना मेरी बहुत पिटाई होगी. फिर मेरे बहुत समझाने पर दीदी मान गई और फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि यह बताओ तुमने मुझे पेशाब करते हुए कितनी बार देखा है? तो मैंने कहा कि सिर्फ चार बार और फिर वो बहुत गुस्से में वहां से चली गई और उन्होंने दो दिन तक मुझसे बात नहीं की. फिर चाची ने एक दिन कहा कि क्या बात है तुम दोनों का कोई झगड़ा हुआ है क्या? तो मैंने कहा कि नहीं एसी कोई बात नहीं है, बस ऐसे ही थोड़ा सा.
उसके अगले दिन दीदी मुझसे बोली कि आज हमे आँगन की सफाई करनी है तो तुम मेरे साथ मेरी मदद करना, मैंने कहा कि ठीक है और मैंने उनकी सफाई में पूरी पूरी मदद की और फिर दो दिन बाद हम सब खाना ख़ाकर बैठे हुए थे और उस समय रात के करीब 9 बजे थे कि तभी अचानक से लाईट चली गई तो चाची ने मोमबत्ती जलाई और हम फिर आँगन में आ गये. अब चाचा सोने चले गये और चाची को भी नींद आ रही थी. तभी दीदी ने कहा कि रेहान मेरे साथ आना.
फिर उन्होंने मुझे एक मोमबत्ती दे दी और मुझसे कहा कि चलो, वो मुझे बाथरूम के पास ले गई और कहा कि तुम यहीं पर रूको मुझे बाथरूम जाना है और फिर वो मुझसे मोमबत्ती लेकर बाथरूम के अंदर चली गई और जैसे ही दीदी दरवाजे को अंदर से बंद करने लगी तो मैंने उनसे कहा कि दीदी यहाँ पर बहुत अंधेरा है और मुझे अँधेरे में डर लगता है, प्लीज तुम दरवाज़ा बंद मत करो. तो दीदी फिर गुस्सा हो गई और कहा कि तुझे शर्म नहीं आती ऐसा कहते हुए, में तेरी बहन हूँ? और में यहाँ पर तेरे सामने पेशाब करूं? फिर मैंने कहा कि तो क्या हुआ दीदी मैंने तो इससे पहले भी कई बार आपको पेशाब करते हुए देखा है ना? तो वो बोली कि चुप बेशर्म कहीं का, लेकिन मैंने फिर भी उनसे आग्रह किया और कहा कि में वहां पर नहीं देखूंगा, लेकिन आप दरवाजा बंद ना करे.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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(This post was last modified: 26-05-2022, 11:38 AM by
neerathemall. Edited 1 time in total.)
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फिर एक रात को जब हम सो रहे थे तभी अचानक से मैंने देखा कि दीदी की मेक्सी के बटन खुले हुए थे शायद ज्यादा गर्मी की वजह से दीदी ने खोले होंगे, मुझे उनकी गोरी गोरी छाती साफ साफ दिखाई दे रही थी तो मैंने थोड़ी हिम्मत करके उन पर हाथ रख दिया. दीदी उस समय बहुत गहरी नींद में थी और मेरे हाथ रखने का उन्हे कुछ भी पता नहीं चला तो मैंने हाथ को थोड़ा अंदर किया और धीरे धीरे ब्रा के अंदर करने लगा. तभी मुझे उनके बूब्स पर आगे की तरफ बढ़ते हुए निप्पल का स्पर्श हुआ, अब मेरा लंड तो एकदम से खड़ा हो गया था और पूछो ही मत उस समय मेरा क्या हाल था?
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फिर कुछ देर ऐसे ही मज़े लेकर में भी सो गया और अब में हर रोज़ रात को मौका देखकर यही सब करता रहा, लेकिन इस बीच दीदी एक बार भी नहीं जागी तो मेरी हिम्मत अब धीरे धीरे बढ़ने लगी और फिर एक रात को मैंने दीदी की सलवार का नाड़ा थोड़ा ढीला किया और अंदर हाथ डाल दिया. अंदर दीदी ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी तो इसलिए मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और अब मेरा हाथ दीदी की चूत पर फिसल रहा था और उनकी चूत के बाल एकदम मुलायम और छोटे छोटे थे. में अपने हाथ को थोड़ा आगे की तरफ ले गया और उनकी चूत के बीच में डालने की कोशिश करने लगा, लेकिन तभी अचानक से दीदी ने करवट ले ली और में डरकर सो गया और फिर दो दिन तक ऐसा ही चला और एक दिन दीदी ने मुझे पकड़ लिया, लेकिन फिर भी उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा.
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फिर दीदी ने पेशाब किया और मैंने पानी से उनकी चूत को धोया और उसी समय चूत के अंदर उंगली भी की, उससे दीदी खुश हो गयी और फिर तो हर रोज़ यही सब होने लगा, दीदी को नहाना होता या पेशब करना होता तो वो मुझे अपने साथ लेकर जाती और में उनकी चूत में बहुत देर तक उंगली करता. फिर एक रात को मैंने दीदी से कहा कि दीदी मुझे आपका दूध पीना है तो वो बोली कि मुझे दूध नहीं आता. फिर मैंने कहा कि अच्छा, लेकिन एक बार निप्पल तो चूसने दो.
दीदी ने अपने एक बूब्स को बाहर निकालकर मेरे मुहं में दिया और फिर में चूसता रहा और एक हाथ की उंगली को उनकी चूत में करता रहा. अब तक मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था तो मैंने दीदी से कहा कि दीदी आप मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ो ना और दीदी ने पकड़ लिया. फिर मैंने दीदी से कहा कि दीदी में आपसे एक बात कहूँ, कहीं आप बुरा तो नहीं मनोगी? दीदी ने कहा कि हाँ बोलो क्या बात है? तो मैंने उनसे कहा कि आप एक बार मेरा लंड चूसो ना प्लीज. दीदी पहले तो वो मुझसे मना कर रही थी, लेकिन मैंने जब उनको बहुत देर तक समझाया तो वो मान गई और मेरा 5 इंच का लंड मुहं में लेकर चूसने लगी और तभी मैंने पहली बार दीदी की चूत को चाटा और उनका सारा चूत का रस पी गया और दीदी भी मेरे लंड से बाहर निकला गरम सफेद जूस (वीर्य) पी गयी. मैंने उनके साथ ऐसा तब तक किया जब तक में वहां पर रहा, लेकिन मैंने उन्हे कभी नहीं चोदा.
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फिर दीदी ने पेशाब किया और मैंने पानी से उनकी चूत को धोया और उसी समय चूत के अंदर उंगली भी की, उससे दीदी खुश हो गयी और फिर तो हर रोज़ यही सब होने लगा, दीदी को नहाना होता या पेशब करना होता तो वो मुझे अपने साथ लेकर जाती और में उनकी चूत में बहुत देर तक उंगली करता. फिर एक रात को मैंने दीदी से कहा कि दीदी मुझे आपका दूध पीना है तो वो बोली कि मुझे दूध नहीं आता. फिर मैंने कहा कि अच्छा, लेकिन एक बार निप्पल तो चूसने दो.
दीदी ने अपने एक बूब्स को बाहर निकालकर मेरे मुहं में दिया और फिर में चूसता रहा और एक हाथ की उंगली को उनकी चूत में करता रहा. अब तक मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था तो मैंने दीदी से कहा कि दीदी आप मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ो ना और दीदी ने पकड़ लिया. फिर मैंने दीदी से कहा कि दीदी में आपसे एक बात कहूँ, कहीं आप बुरा तो नहीं मनोगी? दीदी ने कहा कि हाँ बोलो क्या बात है? तो मैंने उनसे कहा कि आप एक बार मेरा लंड चूसो ना प्लीज. दीदी पहले तो वो मुझसे मना कर रही थी, लेकिन मैंने जब उनको बहुत देर तक समझाया तो वो मान गई और मेरा 5 इंच का लंड मुहं में लेकर चूसने लगी और तभी मैंने पहली बार दीदी की चूत को चाटा और उनका सारा चूत का रस पी गया और दीदी भी मेरे लंड से बाहर निकला गरम सफेद जूस (वीर्य) पी गयी. मैंने उनके साथ ऐसा तब तक किया जब तक में वहां पर रहा, लेकिन मैंने उन्हे कभी नहीं चोदा.
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