Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received: 11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
मैं जाकर एक लंबे मोटी डाल पर बैठ गयी.
अब वक़्त आ गया था अपनी चाल चलने का।
मैं ज़ोर जोर से चीखने लगी- अरे कोई है, मुझे नीचे उतारो, मैं यहां फंस गई हूं, कोई तो आओ मुझे उतार दो।
दो सेकंड में अमित भागता हुआ आया।
उसने मुझे देखा और पूछा- तुम ऊपर क्या कर रही हो?
मैंने बोला- मैं तो आम तोड़ने आई थी. चढ़ तो गई पर उतर नहीं पा रही। प्लीज उतार दो ना।
और मैं रोने का नाटक करने लगी।
अमित ने दो मिनट रूकने को बोला और लोहे की एक सीढ़ी लेकर आया. जिस टहनी पर मैं बैठी थी, उसने उस पर सीढ़ी को टिका दिया.
मैं बोली- मुझे सीढ़ी उतरनी नहीं आती. तुम एक बार चढ़ के फिर उतर के बता दो।
अमित के चेहरे पर थोड़ी झुंझलाने जैसे भाव आए फिर न जाने क्यूं वह मुस्कुरा कर सीढ़ी चढ़ गया।
जैसे ही वह ऊपर आया और फिर नीचे उतरने को हुआ मैं बोली- तुम उतरो और तुम्हारे बाद मैं उतरती हूं।
उसने बोला- एक वक्त पर दो लोग?
तो मैंने कहा- देखते नहीं, लोहे की सीढ़ी है. दो लोग का भार झेल लेगी।
मैंने तो बस बहाना किया था कि नीचे उतरते वक़्त वो मेरी नंगी चूत के दर्शन कर सके।
अब खेल शुरू हुआ।
वो सीढ़ी उतर रहा था और मैं उसके ऊपर अपनी गदराई गांड को जान बूझकर मटका कर उतर रही थी.
हवा मेरा साथ दे रही थी, मेरी स्कर्ट उड़ उड़ जा रही थी।
मैं इतना तो जान रही थी कि अमित मेरी चूत को निहार रहा है और मेरी गोलाकार गांड को भी।
जैसे ही एक दो सीढ़ी बची, मैंने जान बूझकर पकड़ ढीली की और उसके ऊपर गिर गई।
मैं जैसे ही गिरी उसकी मजबूत हाथों ने मुझे कमर से थाम लिया।
हाय रे बदकिस्मती … मैं तो चाहती थी वो मुझे मेरी चूचियों से थामे।
मैं पलटी और जोर से अमित को अपनी बांहों में जकड़ लिया। मेरे कठोर हो चुके निप्पल उसके सीने में दब गए।
अमित अब तक पिघल चुका था. मैं अपनी नंगी गांड पर उसके खड़े लंड को महसूस कर सकती थी।
मैं झट से खड़ी हो गई और उसे धन्यवाद बोल कर दौड़ती हुई बंगले की तरफ भागी.
अपने कमरे में जाकर मैं अपनी चूत के दाने को रगड़ रगड़ खूब पानी पानी हुई।
अब बस मुझे उसका लंड चाहिए था। मैं अब उसकी पहल का इंतजार कर रही थी।
मौसी खाना फ्रिज में रख कर गई थीं। मैं किचन में गई तो देखा अमित अपने हिस्से का खाना निकाल चुका है।
मैं खाना लेकर जैसे ही डाइनिंग टेबल पर आई तो देखा कि अमित वहां बैठा हुआ है. खाना वो खा चुका था और अब उठने ही वाला था.
मुझे देख वह दुबारा बैठ गया।
मैं शर्माने का नाटक करने लगी।
अमित ने बोला- एक बात कहूं, तुम शायद बगीचे में अपना कुछ भूल गई थी.
और उसने मेरे सामने मेरी पैंटी हवा में लहराई.
मैंने तुरंत उसे उसके हाथों से झटकना चाहा तो अमित ने मेरे हाथों को दबोच लिया और बोला- मैं जानता हूं तू मुझसे चुदना चाहती है. मुझे अपनी चूत और गांड तूने जानबूझ कर दिखाया था।
मैं कुछ कह पाती इससे पहले ही अमित ने मेरी पैंटी को मेरे मुंह में ठूंस दिया।
मेरे मुंह मैं कोई नमकीन सा स्वाद घुल गया।
अमित ने मेरी पैंटी पर अपनी मूठ मारी थी, मैं समझ गई।
अब अमित ने मेरे गोल गालों को दबोचा। तो मैंने खांसते हुए पैंटी को मुंह से गिरा दिया।
अमित एकटक मेरी नशीली आंखों को तो कभी मेरे रसभरे होंठों को देखता रहा।
उसने धीरे से मेरे निचले होंठ को चूस लिया। मेरे शरीर में तरंगें प्रवाहित होने लगी। मैं भी उसके होंठों को चूसने लगी। मैं कभी उसके होंठ चूसती तो कभी उसकी लंबी जीभ को अपने होंठों से पकड़ कर ज़ोर से चूसती.
अमित अपनी जीभ मेरे मुंह में घुमाता। अमित ने मेरे चूचियों को दबोच लिया और हल्के हाथों से उन्हें मसलने लगा।
अब मैं नशे में डूबी अधखुली आंखों से मजा लेने लगी।
अमित ने टॉप के ऊपर से ही मेरे निप्पल को अपने नाखून से रगड़ा। मैं तिलमिला उठी और अपनी जांघों से उसे कमर से दबोच लिया.
यह सारा कांड हम लोग डाइनिंग टेबल पर कर रहे थे।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received: 11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
उसने मेरे टॉप को निकाला और मेरी ब्रा को निकाल मेरी चूचियों को जोर से मसलने लगा। मेरी गोरी सुडौल चूचियां उसके हाथों के दबाव से लाल हो गई थी। मेरे भूरे निप्पल को वो किसी छोटे बच्चे की तरह चूस रहा था और हाय … मेरी जान निकली जा रही थी।
मुझसे रहा न गया और मैंने उसके मुंह से अपना दूध छुड़ा उसके मलाईदार कुल्फी पर झपट पड़ी।
जैसे ही मैंने उसका शॉर्ट्स सरकाया, उसका सात इंच का मोटा सा लंड उछल कर खड़ा हो गया।
मैंने एक नज़र अमित से मिलाई और फिर उसके लंड की चमड़ी को हल्का सा पीछे सरकार उसके गुलाबी रंगत लिए टोपे को अपने मखमली होंठों से एक चुंबन दिया. और अपनी जीभ को नुकीला बना मैंने उस टोपे को सहलाने शुरु किया.
और कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अमित की आंखों में देखा और गपाक से पूरा लंड अपने मुंह में भर लिया।
मुझे अंदाज़ नहीं था कि यह मेरे गले तक चला जाएगा। मेरी आंखों में आंसुओं आ गए।
मैंने हल्का सा लंड बाहर निकाल के अपने होंठों को भींच लिया और जोर जोर से चूसने लगी।
अभी मैं और चूसना चाह रही थी पर अमित ने मुझे गोद में उठा लिया।
मैं उसकी गोद में छोटी सी लग रही थी। आखिर एक फुट का अंतर जो था।
अमित ने खड़े खड़े ही मुझे गोद में ही टांगों को फैलाया और मेरी चूत के मुहाने पर लंड रखा। और एक ही धक्के में सटाक से जड़ तक लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।
ऐसा लगा मुझे जैसे कि किसी ने मेरी चूत ही फाड़ दी।
मैं चीख उठी और दर्द से तड़प उठी।
अमित बेरहम जल्लाद की तरह नीचे से मुझे घपाघप चोर रहा था। मेरी कसी हुई अनचुदी चूत को उसने आज भरपूर चोदने का सोच रखा था। उसका मोटा लंड अंदर बाहर जाता रहा और मेरी चूत का दर्द अब मीठे दर्द में बदल गया था।
अमित थक चुका था. उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया तो उसकी नज़र मेरी और उसकी जांघ पर लगे खून पर गई।
तो उसने बोला- अरे, तेरी सील टूटी नहीं थी क्या अभी? मैं तो तुझे सौ लौड़ों से चुदी हुई रंडी समझ चोद रहा था. तूने बताया क्यूं नहीं? मैं तुझे आराम से चोदता।
मैं कुछ बोली नहीं और अपनी जांघें फैला दी।
अमित ने अपने लंड का टोपा मेरे चूत के दाने पर रगड़ा और मैंने कसमसा कर जबरन उसका लंड पकड़ चूत में घुसाने लगी। तो उसने खुद ब खुद अपना लंड अंदर डाल दिया और मेरे दूध को दबाते हुए चोदने लगा।
उसका गर्म मोटा लंड मेरी चूत की गद्दीदार कसी दीवार को रगड़ता हुआ मुझे पेलता रहा।
15 मिनट की चुदाई के बाद उसने अपनी मलाई से मेरी चूत को भर दिया। हम दोनों निढाल पड़े वहीं सो गए.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.