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मैं कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र हूँ और जब मेरे प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा खत्म हुई तो मैं 15-20 दिन के लिए फ्री हो गया, तो मैंने छुट्टियों में इंदौर जाने का फ़ैसला किया जहाँ मेरी बड़ी दीदी रहती हैं। उनकी शादी आज से दो साल पहले हो गई थी और अब वो इंदौर में ही रहती हैं। मेरी दीदी का नाम आरती, उम्र 23 साल है, उनका रंग गोरा और उनका फीगर एकदम मस्त है, पर मैंने अपनी दीदी को चोदने के बारे में कभी नहीं सोचा, हम दोनों का रिश्ता हमेशा से ही भाई-बहन तक सीमित रहा है।
तो मैंने दीदी की ससुराल जाने का और वहाँ एक सप्ताह रहने का प्लान बना लिया, मैं इंदौर के लिए सुबह घर से निकल गया और ट्रेन से दो बजे तक इंदौर पहुँच गया, वहाँ जीजाजी मुझे लेने पहुँच गए और हम आधे घंटे में दीदी के ससुराल पहुँच गए।
दीदी ने मुझे देखते ही गले लगा लिया क्योंकि हम बहुत समय बाद मिल रहे थे। दीदी को देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए, वो पहले से भी ज्यादा सुडोल और फूली हुई लग रही थी और उनके स्तन पहले से कहीं ज्यादा बड़े लग रहे थे, उस समय मुझे दीदी को देख कर उन्हें चोदने का मन करने लगा। इन सबके बाद मैंने घर पर खाना खाया और सभी घर वालों से बात करने लगा पर दीदी ने मुझे टोक कर कहा- तुम थक गए होगे इसलिए थोड़ा आराम कर लो !
और मैं भी सोने के लिए चला गया। मैं चार बजे सोया और शाम को सात बजे उठ गया, मैंने उठने के बाद थोड़ी देर टी.वी. देखा और नौ बजे तक डिनर का वक्त हो गया। हम सभी ने खाना खाया और बात करने लगे। यह सब होते-होते 11 बज गए और सबका सोने का समय हो गया।
दीदी को पता था कि मैं थोड़े शर्मीले स्वभाव का हूँ इसलिए दीदी ने मुझे अपने साथ सोने को कहा।
यह सुन कर तो मेर पप्पू फुंफ़कारें मारने लगा। जीजाजी भी यह कह कर राजी हो गए की दोनों भाई-बहन बहुत दिनों बाद मिले है, तो इन दोनों को बहुत सारी बातें करने होगी। ये सब बातें होने के बाद सभी अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। दीदी के सास-ससुर एक कमरे में, देवर एक कमरे में और जीजाजी जी अलग कमरे में और दीदी वाले कमरे में दीदी, मैं और उनकी एक साल की बच्ची जिसका नाम कृति है सोने के लिए गए।
दीदी के कमरे में जाने के बाद मैंने देखा कि वहाँ सिंगल बेड ही था पर मैंने सोचा कि इसमें मेरा ही फायदा है, दीदी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी पर मुझे पता था कि दीदी मेक्सी पहन कर सोती है। इसके बाद दीदी ने बाथरूम में जाकर काले रंग की मेक्सी पहन ली, इसमें वो और भी सेक्सी लग रही थी, उनके स्तनों का आकार साफ़ दिखाई दे रहा था और मैं उन्हें ही घूर रहा था।
इसके बाद बेड की बाईं ओर दीदी लेट गई, दाईं तरफ मैं और बीच में मेरी एक साल की भांजी कृति लेट गए। यह देख कर मैं निराश हो गया क्योंकि मैं दीदी के साथ सोना चाहता था। दीदी कृति को सुलाने के लिए उसे अपने दायें स्तन से दूध पिलाने लगी और स्तनों के ऊपर दुपट्टा डाल लिया और दीदी मुझसे बात भी कर रही थी। मैं बीच-बीच में चुपके से दीदी के स्तनों को दुपट्टे के ऊपर से ही निहारने की कोशिश भी कर रहा था और शायद दीदी ने मुझे यह करते हुए देख भी लिया था।
मैं केवल अंडरवियर और बनियान में ही सोता हूँ तो उस दिन भी मैं वैसे ही सो रहा था और मैंने एक चादर ओढ़ रखी थी।
बातें करते करते हमें साढ़े बारह बज गए और कृति भी सो चुकी थी इसलिए हम भी सोने लगे लेकिन मैं अभी भी दीदी को चोदने के बारे में ही सोच रहा था। पर मेरे और दीदी के बीच में कृति आ रही थी तो मैंने सोचा कि आज तो कुछ नहीं हो सकता।
और मैं भी सोने लगा पर भगवान को तो यह मंजूर नहीं था इसलिए लगभग आधे घंटे बाद कृति की नींद खुल गई और इससे दीदी की भी नींद खुल गई और दीदी उसे चुप कराने लग गई पर उसके चुप न होने पर दीदी ने उसे दूध पिलाने की सोची। क्योंकि दीदी ने पहले उसे अपने दायें स्तन से दूध पिलाया था इसलिए उसे अपने बायें स्तन से दूध पिलाने के लिए दीदी बीच में आ गईंऔर कृति को बेड की बाईं तरफ सुला दिया और दूध पिलाने लगी।
यह सब देख मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद कृति फिर से सो गई और दीदी की भी नींद लग गई। दीदी अपनी गांड मेरी तरफ करके सोयी हुई थी और जैसा कि मैंने बताया था कि हम सिंगल बेड पर थे इसलिए जगह भी कम थी तो मैं थोड़ा दीदी की तरफ सरक गया। अब मेरा लंड जो पहले से ही खड़ा हुआ था, अब मेरी दीदी की गांड से छूने होने लगा था, मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था, मैंने अपना लंड अंडरवियर के बाहर निकाल लिया और दीदी की मेक्सी के ऊपर से ही धीरे-धीरे उनकी गांड मारने लगा।
अभी तक दीदी की नींद नहीं खुली थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और अब मैंने पीछे से दीदी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें सीधा लेटा दिया, दीदी ने थोड़ी बहुत हलचल की पर वो अभी भी नींद में ही थी। दीदी का एक स्तन अभी भी बाहर ही था क्योंकि उन्होंने कृति को दूध पिलाने के बाद उसे अन्दर नहीं किया था।
यह देखकर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उनके खुले स्तन पर रख दिया और उसे सहलाने लगा और साथ में उसे दबाने भी लगा। फिर मैंने दीदी की मेक्सी के सारे बटन खोल दिए और मुझे उनकी ब्रा दिखने लगी, मैं ब्रा के ऊपर से ही दीदी के चूचों को मसल रहा था और दीदी अभी भी सोयी हुई थी तो मैंने अपना एक हाथ दीदी की जांघ पर रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। फिर मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ दीदी की चूत के ऊपर रख दिया और मेक्सी के ऊपर से ही चूत की दरार में अपनी उंगलियाँ फेरने लगा।
थोड़ी देर बाद दीदी मुझे कुछ कसमसाती लगी, मुझे लगा कि दीदी की नींद खुल गई, इसलिए मैंने जल्दी से अपना हाथ हटा लिया और बिल्कुल भी नहीं हिला। लेकिन दीदी का कोई भी विरोध न करने पर मेरी हिम्मत बढ़ गई पर मेरे हाथ-पैर कांप भी रहे थे, लेकिन मैंने हिम्मत करके फिर से दीदी की चूत पर हाथ रख दिया और उसे जोर-जोर से मसलने लगा और अब शायद दीदी भी जग चुकी थी, दीदी ने थोड़ी देर बाद अपनी आँखें खोल ली और उनके कुछ कहने से पहले मैंने अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए और उन्होंने भी मेरा कोई विरोध न करते हुए मेरा साथ दिया।
पांच मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे को चूमते रहे और इसके बाद दीदी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी।
मैंने भी दीदी की मेक्सी ऊपर करके उनकी जांघों से होता हुआ उनकी चूत पर पहुँच गया और सहलाने लगा। दीदी की पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी तो मैंने पहले दीदी को उनकी मेक्सी उतारने को कहा और अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी, उनका बदन एकदम दूध जैसा गोरा था, उनके स्तन काफी कड़े हो चुके थे। मैंने उनकी ब्रा भी उतार फेंकी, उनके स्तन बहुत बड़े थे और मैं पहली बार इतने पास से किसी औरत के स्तन देख रहा था।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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ने स्तनों को बहुत चूसा और फिर दीदी की पेंटी उतार दी। उनकी चूत को देख कर मैं हैरान रह गया, उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे जो उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारकर उनकी टाँगें चौड़ी कर दी। दीदी की चूत के दोनों होंठ बिल्कुल गुलाबी थे।
जैसे ही मैंने उनकी चूत पर अपना हाथ रखा, मुझे अपने हाथ में असीम गर्माहट का एहसास हुआ और दीदी भी बहुत गर्म हो चुकी थी और आ आ आ ऊ ऊ ऊ के स्वर निकाल रही थी। इसे सुनकर मैं और भी उत्तेजित हो रहा था।
इसके बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और मैं उनकी चूत चाट रहा था जबकि वो मेरे लंड को बड़े चाव से चूस रही थी।
लगभग 15 मिनट चूसने के बाद दीदी बोली- वरुण, अब नहीं रुका जाता, जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दे।
फिर मैंने दीदी की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने लंड के सुपारे को दीदी की चूत पर रखकर जोर का धक्का लगाया और मेरा आधा लंड दीदी की चूत में चला गया।
दीदी अपने मुख से कामुक आवाजें निकाल रही थी और कह रही थी- फाड़ दे आज मेरी चूत ! और जोर से ! और जोर से।
इसके बाद मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी और करीब दस मिनट हिलने के बाद मैं झड़ गया और दीदी के ऊपर ही लेट गया।
पर मैं कहाँ अभी मानने वाला था, लगभग 15 मिनट बाद मैं फिर से दीदी को चोदने के लिए तैयार हो गया और इस बार मैंने दीदी को अलग प्रकार से चोदा। इस वाले दौर में दीदी भी झड़ गई। बाद में दीदी ने मेरा पूरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया।
उस रात दीदी को मैंने दो बार और चोदा और जब तक मैं दीदी की ससुराल में रहा, मैंने दीदी को खूब चोदा और उनकी गांड भी मारी।
फिर मैं भोपाल वापस आ गया और अब दीदी से फ़ोन पर ही सेक्स की बातें होती हैं। उसके बाद से मैंने अभी तक किसी और लड़की की चूत नहीं मारी पर मैं इधर से उधर चूत मारने के लिए लड़कियों को ढूंढता फिरता हूँ।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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मेरा नाम भूपेन्द्र सिंह है। मैं रानीखेत, हिमांचल प्रदेश का रहने वाला हूँ। मैं बहुत गोरा लड़का हूँ इसकी वजह है कि मेरी माँ और पापा का रंग भी दूध जैसा साफ़ है। मेरी हाईट 5’ 8” है। लड़कियाँ मुझ पर फ़िदा रहती है और खुद ही आगे बढकर मुझे प्रपोज करती है। मैं किसी लड़की से चूत नही मांगता हूँ, सब खुद ही मुझे दे देती है। मेरी किस्मत हमेशा ही मेरा साथ निभाती है
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मैं खुद को बहुत लकी मानता हूँ क्यूंकि मैंने एक से एक हसीन लड़की की रसीली चूत को चोदा है। दोस्तों मुझे नही मालुम था की एक और खूबसूरत चूत पर मेरा नाम लिखा हुआ है। हुआ ये ही 6 महीने पहले मेरी छोटी बहन राधा की शादी हुई थी। शादी के बाद मेरी मुलाकत बहन की जेठानी से हुई। देखकर ही मैं फ़िदा हो गया था। मेरी बहन की ससुराल में, सास, ससुर, जेठ, मेरे जीजा जी सब लोग काले कलूटे थे और देखने में कोई खास नही थे। पर जब मैंने बहन की जेठानी को देखा तो लंड उसी समय खड़ा हो गया था। उनका नाम पूर्वी था और इतनी सुंदर थी की क्या बताऊं। मुझे देखकर वो हंसने लगी। मैं उनको भाभी कहने लगा क्यूंकि मेरे जीजा जी की वो भाभी लगती थी।
“मैं तुम्हारी भाभी नही दीदी लगी” पूर्वी दीदी कहने लगी
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मैंने सोचना लगा की मैं देवर भाभी का रिश्ता चला रहा था पर अब वो मेरी दीदी लगती है क्यूंकि मैंने अपनी बहन की शादी उस घर में कर दी है। उसके बाद से उनसे अक्सर ही मुलाकात होने लगी। पूर्वी भाभी को अब मैं मनमसोज कर पूर्वी दीदी कहने लगा था पर उनको चोदने का सपना तो था ही। मैं हर महीने ही अपनी बहन की ससुराल चला जाता था क्यूंकि मेरी माँ अक्सर कुछ न कुछ सामान भेजती रहती थी। हमारे इधर कहावत है की माँ बाप को लड़की को शादी के बाद सारी जिन्दगी कुछ न कुछ देते रहना चाहिये। इसलिए मैं हर महीना कुछ न कुछ लेकर राधा बहन के यहाँ जाया करता था।
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पूर्वी दीदी के पति रिश्ते में मेरे बड़े जीजा जी लगते थे। इसलिए मेरी अच्छी दोस्ती उनसे भी हो गयी थी। मेरा सगे जीजा जी और उनके बड़े भाई दोनों एक ही घर में मिलजुलकर रहते थे। बड़ा प्यारा परिवार था। किसी तरह का कोई झगड़ा लड़ाई नही होता था। इसलिए मैं भी बहुत खुश हो गया था की बहन की शादी अच्छे घर में हो गयी। कितनी अच्छी बात है। पर दोस्तों जैसे जैसे और टाइम बीतने लगा मेरा पूर्वी दीदी को चोदने का बड़ा दिल करने लगा। उनकी आवाज बिलकुल कोयल जैसी थी। चेहरा बहुत सुंदर था। उनके पापा बिलकुल काले कलूटे थे। मैं यही सोचता था की बाप कितना काला है पर लड़की देखो कितनी माल है। कुछ दिन तक पूर्वी दीदी को याद कर करके लंड पकड़कर मुठ मार लेता था।
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बड़ा आनन्द आता था। कुछ दिन बाद मेरे जीजा जी अपना मकान बनवाने लगे तो मुझे जाना पड़ा। जीजा जी अपनी नौकरी में बीसी रहते थे, उनके पास टाइम नही था। मुझे ही सब काम करवाना पड़ता था। पूर्वी दीदी रोज चाय लेकर आती। मैंने धीरे धीरे उनका हाथ पकड़ना शुरू कर दिया। वो मुझे अजीब नजर से देखने लगी। अगले दिन ससुराल में कोई नही था। सब कही गये थे। पूर्वी दीदी अकेले घर में थी। मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने सोचा की इस माल को आज चोद लेना चाहिये। मैं अदंर घर में गया। पूर्वी दीदी काम कर रही थी।
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“भूपेन्द्र तुम?? क्या कोई बात करनी है??” पूर्वी दीदी बोली
मैंने उसी वक्त उनका हाथ पकड़ लिया। किस करने की कोशिश की। वो नाराज हो गयी।
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क्या बदतमीजी है ये भूपेन्द्र??” वो गुस्सा करके बोली
“मेरे साथ हनीमून मनाओगी आप। मुझे अपनी चूत दोगी क्या??” मैंने कहा
उनकी आँख आग उगलने लगी।
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“मैं आजतक किसी लड़की के पीछे नही भागा हूँ। हर लड़की ने मुझे ही आकर चूत दे दी है। कभी किसी से मांगी नही। पर तुम मुझे बहुत प्यारी लगी हो। मुझे चुदाओगी तुम??” मैंने कहा और उनको पकड़ लिया। ओंठ पर चुम्मा देने लगे। उनको गॉड ने बड़ी फुर्सत में बैठकर बनाया था। तभी तो ऐसा रुप रंग उन्होंने पाया था। खूबसूरत लम्बा चेहरा। कोहिनूर सी आँखे, संतरे जैसे होठ, थोड़ी लम्बी चोंचदार नाक, भरा हुआ बदन, बड़े बड़े 34” के दूध जो ब्लाउस के उपर से दिखते थे और चूत तो अंदर ही थी। कुछ देर मैंने जबरदस्ती उनके होठ पर होठ रखकर चूस डाला।
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“मैं जाकर अभी तेरे जीजा जी बोलती हूँ” पूर्वी दीदी गुस्से से लाल होकर कहने लगी
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मुझे काफी डर भी लग रहा था क्यूंकि मैंने अपनी बहन की जेठानी को छेड़ दिया था। पर उस दिन जब सब फेमिली मेम्बर घर आये तो ऐसा कुछ नही हुआ। पूर्वी दीदी ने वो बात किसी से नही बोली। कुछ दिन वो मेरे पास नही आई। मैं समझा की नाराज हो गयी। पर अगले ही मेरे कमरे में आ गयी। मेरी बहन की जेठानी यानी पूर्वी दीदी बाथरूम से तुरंत निकली। अपने मस्त मस्त दूध पर उन्होंने तौलिया बाँध रखी थी। उनके भीगे बाल खुले हुए थे जिससे पानी की बुँदे तपक रही थी। टाँगे नंगी थी। वो सुबह 6 बजे ही मेरे कमरे में चाय का प्याला लेकर आ गयी। मैं कमरे में सो रहा था। वो मेरे सीने पर आकर बैठ गयी और अपने बालो से पानी गिराकर मुझे जगाने लगी। मैं जग गया। देखा तो सामने पूर्वी दीदी चूचियों पर सिर्फ तौलिया बांधे हुए थी।
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“क्या भूपेन्द्र!! चोदोगो मुझे??” वो अचानक से बोल दी
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मैं बौखला गया। वो फौरन ही अपने दूध पर बंधी तौलिया की गाठ खोल दी। मेरा तो देखकर ही सब कुछ लुट गया। ये बड़ी बड़ी चूची बिलकुल इंडियन वाली। जैसे भारतीय लड़कियाँ के होती है। रस से भरपूर और काले काले बड़े बड़े गोलों से सुशोभित। मेरा होश उड़ गया। मैंने कोई जवाब न दिया। मेरा गला सूखने लगा।
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“लो आज मेरे दूध जी भरकर चूस लो। मुझे कसके चोदो” पूर्वी दीदी बोली और मेरे मुंह पर दोनों छाती को पकड़कर रख दिया। दोस्तों अब किसी तरह के संवाद की कोई जरूरत नही थी। मैंने भी उनको गले से लगाकर अपने उपर लिटा लिया और किस करने लगा। वो पेंटी भी नही पहनी थी। पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। मैं भी अपना कच्छा बनियान खोलकर नंगा हो गया। और पूर्वी दीदी को अपने सीने पर लिटा दिया।
“पर दीदी घर के सब लोग किधर है???” मैंने व्याकुल होकर पूछा
“सब सो रहे है। तुम मुझे आराम से चोदो। कोई टेंसन नही है” वो कहने लगी
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हम दोनों के होठ आपस में टकरा गये। फिर तो आग लगनी ही थी। चुसी चुस्व्वल होने लगा। पूर्वी दीदी पता नही कैसे मुझसे पट गयी थी। मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था। मैंने उनके कंधे को पकड़ लिया और खूब किस किया ओंठ से ओंठ लगाकर। वो मुझे खाने लगी मुंह पर मुंह रखकर। मैं उनको खाने लगा। बड़ा चुम्मा वाला काम हुआ। मेरे हाथ उनकी पीठ पर अब नाचने लगे।
“पूर्वी दीदी!! क्या बड़े जीजा आपको पेल नही पाते है ठीक है??” मैंने चुटकी ली
“अगर वो मुझे ठीक से चोद पाते तो तेरे पास मैं क्यों आती। वो तो 3 4 मिनट में झड़ जाते है। पर भूपेन्द्र तू अपनी बता। तू कितने मिनट मेरी चूत पर बैटिंग कर पाएगा??” पूर्वी दीदी किसी रंडी की तरह पूछने लगी।
“अभी आपको पता चलेगा” मैंने कहा
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फिर सीने से ऐसे चिपका लिया जैसे वो औरत है। दोस्तों ये सारा करिश्मा उपर वाले का था। जिसमे पूर्वी दीदी को मेरे लिए पटा दिया था। मैं भी उनको बाहों में भरके किस करने लगा। पहले उनकी नंगी सेक्सी पीठ पर अपने हाथ से सहलाकर मैंने मजा लिया। फिर मेरे हाथ उनकी मस्त मस्त गांड और पिछवाड़े पर चले गये। पूर्वी दीदी का फिगर 34 38 36 का था। इससे हसीन क्या हो सकता था। मैं उनके गुब्बारे जैसे फूले चूतड़ पर हाथ लगाकर सहलाने लगा। पूर्वी दीदी “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” करने लगी। वो मेरे सीने पर लेटी रही और मैंने उनकी संतरे जैसे चूची मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। वो अई अई करने लगी। दोस्तों उनके मम्मे मुसम्मी को भी फेल कर रहे थे। मुसम्मी से भी जादा रसीले थे। मैं मजा लेकर चूसने लगा। पूर्वी दीदी चुसवा रही थी। हम लोग की लपटा लपटी चालू हो गयी। उनके दूध पीते पीते ही मैंने करवट भरी। वो नीचे चली गयी। मैं उपर आ गया।
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““चूस भूपेन्द्र!! और मेहनत से चूस!! मजा आ रहा है। मेरी जवानी का रस आप तुम ले लो” पूर्वी दीदी कहने लगी
उनकी बाते मुझे और दीवाना बना गयी। मैं उनके संतरे को और दबा दबाकर चूसने लगा। फिर दूसरी वाली छाती का इसी प्रकार से रस निकाल दिया। मैं उनके पेट से खेलने लगा। दीदी की नाभि चूत जैसी कामुक दिख रही थी। उसमे मैं जीभ डालने लगा। वो चुदासी होकर “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी।
“आआआअह्हह्हह…..मेरी चूत चाटकर मुझे गर्म करो भूपेन्द्र!! ….अई. .अई..”पूर्वी दीदी कहने लगी और अपनी दोनों टांग किसी रंडी की तरह खोल दी
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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