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अरे हां….साले साहब से ही पूछिये ना उनकी बहनों का हाल. इनसे अच्छा कौन बताएगा.????” ‘ये’ बोले.
“बोल साले, बड़ी वाली की चुचियाँ कितनी बड़ी है…???”
“वो…वो उमर में मुझसे एक साल बड़ी है और उसकी…..उसकी अच्छी है….थोड़ी….. मेरा मतलब है… दीदी के जितनी तो नहीं….हां दीदी से थोड़ी छोटी….” हाथ के इशारे से उसने बताया….
मैं शर्मा गई….चुत पानी-पानी हो चुकी थी….लेकिन अच्छा भी लगा सुन के कि मेरा ममेरा भाई मेरे उभारों पे नज़र रखता है….
“अरे तब तो बड़ा मज़ा आयेगा तुझे उसके जोबन (Boobs) दबा-दबा के रंग लगाने में….” ननदोई ‘इनसे’ बोले और फिर मेरे भाई से पूछा, “और छुटकी की….????”
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जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.