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फ्रेंड्स
मेरी फेवरेट और सभी एक्सबी के चाहने वालो की फेवरेट महक का जादू जो की सौंदर्या दीदी ने लिखी है
उसे पोस्ट कर रही हु। पोस्ट करते समय मैं कुछ इमेजेस में बदलाव कर रही हु।
आशा है सभी से उसे प्यार मिलेगा
तनु
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क्यू नही हम आपके कहानियो के बहुत बड़े फैन है बहुत वैट किया है प्यार बरसेंगे कमैंट्स के ज़रिए
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मैंने इसके पहले कभी अपने आपको भी इतना गौर से नहीं देखा था.
इधर रिया अपनी आँखे बड़ी-बड़ी करके मेरी सौन्दर्य का पान कर रही थी.
मेरी नजरे उससे मिली तो वह प्यार से मुस्कुरा दी .
फिर रियाने एक पल में अपना भी टॉप निकल फेका.
उसने टॉप के निचे कुछ भी नहीं पहना था .
टॉप के निकलते ही उसके दो बड़े संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने उछल पड़े.
मैं मंत्रमुग्ध सी उन दो संतरों को देखने लगी,
मन ही मन मैं अपने और उसके स्तन की तुलना करने लगी .
रिया की रंगत सावली है जबकि मैं गोरी चट्टी ,
दोस्तों मेरा रंग दूध में हल्का केसर मिक्स करने के बाद होता है वैसा है .
रिया के निप्पल जामुनी थे तो मेरे गुलाबी .
लेकिन उसके स्तन मेरे स्तनो से आकार में डेढ़ गुना थे.
मुझे इस तरह देखता पा कर रिया हस दी और बोली
" मेरी जान माल पसंद आया की नहीं "
मैं बस शरमाकर मुस्कुराई.
रिया ने मेरा हाथ पकड़कर आपने स्तनों पर रखा और बोली
"महक रानी ये सब तुम्हारे लिये है इसे चूमो "
मैं तो जैसे हिप्नोटाइस हो चुकी थी मेरा सर अनायास ही उसकी छाती पर झुका ....
और मेरे लरजते हुए होठोने उसके निप्पलस को छुआ.
रियाने एक लम्बी सिसकारी भरी,
" स्स्स्सस्स्स्सSSSSS "
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उसके हर काटने के बाद एक अजीबसा मीठा दर्द उठता था.
अचानक ही रिया थोड़ी नीची सरक गयी और उसने मेरी नाभि को चूमना, चूसना चालू किया.
"स्स स्स स्स स्स रिया मेरी जान और करो स्स स्स स्स ...."
वह बिच में ही मेरे स्तनों पर हमला करती और बच मे ही मेरी नाभि पर ......
करीबन २० मिनिट बाद उसने मेरा एक लम्बा चुम्बन लिया और पूछा
"क्यों मेरी जान मजा आया की नहीं "
मैं भी थोड़ी खुल गयी थी .....
मैंने बोला " हा मेरी रिया रानी बहोत मज़ा आया "
यह मेरी जिंदगी का पहिला sex अनुभव था .
सेक्स की रंगीन दुनिया में आज मैंने पहेला कदम रखा था .
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रिया ने घडी की तरफ देखा और बोली
"महक अब मुझे घर जाना चाहिए..... वर्ना मेरे घर वाले ढून्डते हूए आ जायेंगे"
और हमदोनों ने फटाफट कपडे पहने.
मैं: "पर रिया ......"
रिया : "मुझे पता है महक .... तुम्हे बहुत कुछ पूछना है ..... लेकिन अभी नहीं .....
मैं तुम्हे सब कुछ बताऊंगी लेकिन बाद में अब तो हम दोनों एक ही खेल के पार्टनर है"
मैं: " फिर कब आवोंगी ?"
रिया : "बहुत ही जल्दी आउंगी मेरी जान..... तुझसे जादा जल्दी तो मुझे है ....
तेरा मखमली बदन मुझे सोने नहीं देगा "
इतना कहके रिया अपने बुक्स समेटने लगी.
जाते जाते मुझसे कस के लिपट के रियाने एक कड़क चुम्मा मेरे होटों पे दिया
और कुण्डी खोलके बहार निकल गई.
रिया के चले जाने के बाद न जाने कितिनी देर तक मैं वही बैठी रही.
फिर निचेसे मामी की आवाज आई
" महक बेटा शाम होने को है ..... हाथ मुह धोलो और निचे आओ "
हर रोज शाम को मामीजी के साथ मैं आरती करती हूँ.
मैं बाथरूम जाकर फ्रेश हो गई. और निचे पूजाघर की और चल दी .....
आज पूजा में भी मेरा मन नहीं लग रहा था.
मामी ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया ....
उन्होंने सोचा मैं कॉलेज के बारे में या अपने घर के बारे में सोच रही हू.
मैं फिरसे मेरे कमरे में आ गई. पर मेरा मन कही नहीं लग रहा था ,
सामने किताब खुली थी लेकिन आँखों के सामने अभी भी रिया के भरे भरे स्तन ही आ रहे थे .
मैं अभीभी रियाके होटो की नमी अपने होटोपर महसूस कर रही थी.
इतने में मामी की आवाज आई
"महक बेटा तेरे लिए फ़ोन है ...."
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मैंने सोचा की रिया का फ़ोन है ,
मैं भाग कर निचे फ़ोन के पास गई. मैंने फ़ोन उठाया और बोली
" हाय रिया !"
"हेलो बेटा महक मैं तुम्हारी माँ बोल रही हू "
यह सूनकर मैं फिरसे वास्तव में लौट आई.
पढाई का बहाना बना के मैंने जैसेतैसे अपनी माँ से बात जल्दी ही ख़तम की,
आज न जाने क्यों मेरा मन रिया के सिवा दूसरा कुछ भी नहीं सोच रहा था.
मैं फ़ोन रख कर ऊपर पहोची ही थी की निचे फिरसे फ़ोन बज उठा .
फिरसे मामी की आवाज
" महक बेटा फ़ोन....."
मैं फिरसे निचे गई , फ़ोन उठाया और बड़े ही अनमने ढंगसे बोला
" हेलो कौन बोल रहा है ?"
उधरसे रिया की खनकती आवाज आई
" हेल्लो महक ..... वो कल वाली अर्जंट असाइनमेंट की तयारी के लिए मैं तुम्हारे घर आ रही हू...... मैं आज रात को वही सो जाउंगी और सवेरे वही से हम कॉलेज जायेंगे"
मैं सुनती ही रही,
वह क्या बोल रही थी ये पहले समझ नहीं आया ,
लेकिन मैं ताड़ गयी की उसने घर पे कोई बहाना बनया है .
मैं प्रकट में बोली " हा रिया मैं तो तुम्हारी राह देख रही थी ..... तुम कब तक आओगी?"
उसने बताया की वो खाना खाके ९ बजे तक पहुचने वाली है
मैं तो ख़ुशी के मारे दीवानी हो गई थी .
मैं भागते हुए किचन में गयी और मामी से बोली
"मामी जल्दीसे खाना लगादो...... बादमे मुझे बहोत पढना हैं"
मामी अचरज से मेरे इस बदले हूए रूप को देख रही थी.
मामीने हसकर बोला
"बैठ बेटा मैं अभी खाना परोसती हूँ."
खाना खाते खाते मैं मामी से बोली
" मामीजी .... मेरी सहेली रिया है न ........ वो रात को यहाँ आने वाली है ..."
मामी: "इतनी रत को ?"
मैं: "हा मामी हमें कल एक अर्जेंट असाइनमेंट देना है......
इस लिए काफी देर तक पढना पड़ेगा..."
मामी: " तो फिर रियासे बोल .... की वो यही सो जाए ....."